भिलाई (cgaajtak.com)। दुर्ग जिले में प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाने और अपनों को उपकृत करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। कलेक्टर दुर्ग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शिक्षा विभाग के अफसर अपने चहेते शिक्षक दंपती को बचाने में लगे हुए हैं। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गनियारी के व्याख्याता नौशाद खान और शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला तकिया पारा दुर्ग की व्याख्याता महलका बेबी राना (पति-पत्नी) की बिना अनुमति विदेश यात्रा से जुड़ा है।
10 साल पुराने आदेश के भरोसे 2022 में की विदेश यात्रा
दोनों शिक्षकों ने वर्ष 2022 में विभाग से बिना आवश्यक अनुमति प्राप्त किए विदेश यात्रा की थी। वर्ष 2024-25 में टीएल (Time Limit) बैठक में जब इसकी शिकायत दर्ज कराई गई, तो 18 फरवरी 2025 को उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके जवाब में शिक्षक दंपती ने दलील दी कि उन्होंने वर्ष 2012 में मिली अनुमति के आधार पर वर्ष 2022 में अर्जित अवकाश स्वीकृत कराकर विदेश यात्रा की थी। सवाल यह उठता है कि क्या 10 वर्ष पहले जारी हुआ कोई स्वीकृति आदेश वर्तमान में प्रभावशील हो सकता है? प्रशासनिक गलियारों में इसे हास्यास्पद और नियम-विरुद्ध माना जा रहा है।
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कलेक्टर के निर्देशों को भी किया दरकिनार
मामले में कलेक्टर दुर्ग ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि विदेश यात्रा से संबंधित अर्जित अवकाश स्वीकृति के दस्तावेज, सेवा पुस्तिका (Service Book) में इंद्राज और आधिकारिक स्वीकृति आदेश की प्रति तत्काल कार्यालय में प्रस्तुत की जाए। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी डीईओ कार्यालय की ओर से कलेक्टर के आदेश का पालन नहीं किया गया।
तीन-तीन बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई से बचते रहे अधिकारी
कार्रवाई न होने से क्षुब्ध शिकायतकर्ताओं ने शासन-प्रशासन के हर मंच पर अपनी बात रखी:
पहली शिकायत: 20 जनवरी 2025
दूसरी शिकायत: 29 जुलाई 2026 (कलेक्टर जनदर्शन)
तीसरी शिकायत: 2 सितंबर 2026
तीन बार लिखित शिकायत और कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी अपने चहेते कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से कतराते रहे, जिससे उच्च अधिकारियों के कर्तव्यबोध और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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कर्मचारी कल्याण संघ का आरोप: 22 महीने से जारी है अफसरों की ढाल
राज्य पेंशनर एवं कर्मचारी कल्याण संघ के कोषाध्यक्ष रुद्र नारायण सिन्हा ने जिला शिक्षा अधिकारी पर सीधा आरोप लगाया है कि पिछले 22 महीनों से व्याख्याता दंपती को बचाने का खेल चल रहा है। संघ के अनुसार, डीईओ कार्यालय ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 2 बार दिखावे का स्पष्टीकरण मांगा, 3 बार जांच के आदेश जारी किए और 3 बार गलत मार्गदर्शन (Misguidance) देकर संबंधित दोषियों की मदद की। संघ ने अब न केवल विदेश यात्रा करने वाले शिक्षकों पर, बल्कि उन्हें बचाने वाले दोषी अधिकारियों, संबंधित कक्षा प्रभारी और जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
बड़ा सवाल: जब प्रशासनिक व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार अफसर ही कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना करेंगे और अपनों को बचाएंगे, तो फिर आम जनता के पास कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा क्या विकल्प बचता है?
