भिलाई(cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार में विधायकों की भी नहीं चल रही है। विधायक के लिखे पत्र को मंत्री द्वारा डस्टबिन में डालने का मामला सामने आया है। जब सरकार में ही विधायक की नहीं चल रही है, तो आम जनता की हैसियत का सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बेचारी जनता अपनी समस्या लेकर फिर किसके पास जाए?
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दरअसल, मामला राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय, दुर्ग का है। इस कार्यालय का स्थानांतरण 15 अप्रैल 2026 को रायपुर माना कैंप में कर दिया गया है। लगभग ढाई दशक से संचालित इस दफ्तर को इससे पहले भी कई बार रायपुर ले जाने का प्रयास हुआ था, लेकिन हर बार किसी न किसी के हस्तक्षेप के कारण यह टलता रहा। इस बार ऐसा नहीं हो पाया। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी इसे रायपुर ले जाने की चर्चा हुई थी। उस दौरान स्टाफ के विरोध और पूर्व गृहमंत्री को दफ्तर को रायपुर ले जाने से होने वाली परेशानियों से अवगत कराने पर इसे रुकवा दिया गया था।
मामले को लेकर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को पत्र लिखा था। उन्होंने राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय, दुर्ग को यथावत रखने और जारी आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया था। मंत्री ने उनके पत्र को तवज्जो दी या नहीं, यह तो स्पष्ट नहीं है, किंतु कार्यालय का स्थानांतरण रायपुर कर दिया गया है।
इस दफ्तर के अंतर्गत दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव और कबीरधाम (कवर्धा) आदि जिले आते हैं। दफ्तर में मात्र 3 नियमित स्टाफ, 1 कलेक्टर दर पर तथा 1 संविदा नियुक्ति सहित कुल 5 कर्मचारी कार्यरत हैं। स्थानांतरण के बाद कर्मचारियों को रायपुर आने-जाने में परेशानी हो रही है। कर्मचारियों से ज्यादा संभाग के दिव्यांगजन, जो दूरस्थ अंचलों (राजहरा, बालोद, कबीरधाम) में रहते हैं, उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
इसके पहले के जितने भी आयुक्त रहे, वे दुर्ग के बाहर के थे, लेकिन उन्होंने दफ्तर को रायपुर ले जाने का प्रयास नहीं किया। इस बार एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को आयुक्त बनाया गया है। बताया जाता है कि उन्हें कई गंभीर बीमारियां हैं। अपनी बीमारियों के कारण उन्होंने दफ्तर को रायपुर स्थानांतरित कर दिया।
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दुर्ग से मंत्रालय/सचिवालय जाने की कोई सुविधा नहीं
छत्तीसगढ़ राज्य बने 26 वर्ष हो चुके हैं, किंतु मंत्रालय और सचिवालय जाने के लिए दुर्ग से अब तक कोई समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं है। दुर्ग-भिलाई से सीधी बस सेवा भी नहीं चलती है। रायपुर से मंत्रालय जाने के लिए केवल स्टाफ के लिए बस चलती है। सरकार ने ट्रेन की सुविधा तो दे दी है, किंतु ट्रेन से उतरने के बाद मंत्रालय तक पहुंचने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। लोगों को पैदल ही जाना पड़ता है। रास्ते में यदि कोई दुर्घटना हो जाए या पानी की आवश्यकता पड़े, तो न तो पानी मिलता है और न ही कोई मदद करने वाला होता है। मंत्री, नेता और अधिकारी तो लग्जरी कारों में चले जाते हैं, उन्हें आम जनता की तकलीफों से क्या लेना-देना। आम आदमी के लिए राज्य बनने के इतने साल बाद भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।

