भिलाई (cgaajtak.com)। शहर के प्रतिष्ठित तालपुरी इंटरनेशनल कॉलोनी रेसीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन में निम्न स्तर की राजनीति चल रही है। कॉलोनी में सोसायटी चुनाव के पहले राजनीति पार्टियों की तरह आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दो पैनल चुनाव मैदान में और एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। अपराध और अपराधियों की बातें हो रही है। इसके पीछे या मूल में जाने पर पता चलता है कि चुनाव के लिए पिछले चुनाव के पहले विवाद हुआ था और मामले थाना तक पहुंचा था। जब दोनों पक्ष आमने-सामने (काउंटर केस दर्ज) थे तो एक पक्ष अपराधी और दूसरा पक्ष पाक साफ (साधू) कैसे हो गया। जबकि दोनों पक्ष के लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। सोसायटी के कुछ लोग पदाधिकारी बनने के लिए पूरी कॉलोनी के माहौल को दूषित कर रहे हैं। पिछले चुनाव को पंजीयक ने निरस्त कर री-पोलिंग करने कहा है। इसीलिए इसबार चुनाव से पहले सदस्यता अभियान नहीं चलाया गया। कॉलोनी के 439 सदस्य ही फिर से एसोसिएशन के पदाधिकारियों को चुनेंगे। पिछले कमेटी ने बहुत से सदस्यों का नाम काट दिए थे और अपने चेहेतों को सदस्य बना दिया था जिस कारण पंजीयक ने चुनाव को रद्द कर दिया था।
चरण चाटुकार लोग आज ईमानदारी की दुहाई दे रहे
कांग्रेस के कार्यकाल में पूर्व गृहमंत्री की चरण चाटुकार करने वाले लोग आज ईमानदारी की दुहाई दे रहे है। ये वही लोग है जो सोसायटी को कांग्रेस का मंच बना दिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में खुलेआम कांग्रेस और पूर्व गृहमंत्री के नाम पर वोट मांगे थे। यहां तक कहा था कि यदि मंत्री चुनाव हार जाते हैं तो निगम में कांग्रेस की महापौर है इसलिए कांग्रेस को जीताना जरूरी है। मतलब संस्था संगठन को अपनी राजनीति जागीर समझने लगे थे। राजनीति ही करनी थी तो पार्टी ज्वाइन कर लेते। भाई तालपुरी सोसायटी को कांग्रेस -बीजेपी क्यों कर रहे थे। कॉलोनी में तो बीजेपी-कांग्रेस होना ही नहीं चाहिए। इसी तरह निगम चुनाव में भी पार्षद मैडम को बहुत परेशान इन्हीं लोगों ने किया था। कांग्रेस की ओर से गैर सदस्य (किराएदार) महिला को पार्षद प्रत्याशी बना दिया था। चुनाव हारने के बाद वह पति सहित कॉलोनी को छोड़कर भाग गई।
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मंदिर की राजनीति और पूर्व मंत्री
इन्हीं लोगों ने बी ब्लॉक में निर्मित भगवान शिव मंदिर को अवैध घोषित करवा दिया था। मामले को लेकर बहुत नाटक नौटंकी हुई थी। हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर गए फिर पूर्व गृहमंत्री की शरण में गए और कहा गया कि मामले को पूर्व मंत्री ने सुलझा लिया है। मंत्री के आदेश पर मंदिर अवैध से वैध हो गया। यह सब बातें पढ़े लिखे लोगों से कही गई थी। जबकि सबको मालूम है कि पूर्व मंत्री को कोई अधिकार नहीं था। मामला पहले कैबिनेट की बैठक में जाता है फिर उसके बाद शासन के सचिव के हस्ताक्षर से पत्र जारी होता है। यह नियम है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस मामले में कुछ लोगों ने पूर्व मंत्री को हीरो बना दिया था। इसके बाद भी वे चुनाव हार गए। जब पढ़े लिखे लोगों की कॉलोनी में (यहां कोई अनपढ नहीं) इस तरह की घटिया राजनीति हो रही है तो झुग्गी-झोपड़ी और बस्तियों में ऐसे लोग चुनाव के समय कैसे राजनीति करते होंगे यह सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है।
मारपीट और कागजात किसने छीना था?
पिछली कमेटी के चुनाव के पहले क्लब हाउस में जूतम पैजार हुई थी। उस लड़ाई को वकील पर हमला बता दिया था और तत्काल FIR करवा दी गई थी। जबकि मामला कॉलोनी और सोसायटी था। वकील वहां पर बतौर सदस्य उपस्थित थे न कि वकील के रूप में। लोग तो यहां तक बताते हैं कि कॉलोनी की राजनीति में सक्रिय उस वकील की डिग्री ही फर्जी है। कुछ लोग उनकी डिग्री की सत्यता की जांच में लगे हुए है।
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हास्यास्पद बातें हो रही
जो लोग कॉलोनी की संस्था को राजनीति का अखाड़ा बनाकर अशांति फैला रहे हैं वे ही लोगों से शांति की अपील कर रहे हैं। कॉलोनी का चुनाव कोर्ट (पंजीयक) के निर्देश पर शासन के मार्गदर्शन में हो रहा है। ये लोग इतने पाक साफ थे तो साल 2017 के बाद से चुनाव क्यों नहीं करवाए। मामला पंजीयक कोर्ट में नहीं जाता तो ये लोग आज भी कुंडली मारकर बैठे रहते।
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सुनील चौरसिया के योगदान को भूलाया नहीं जा सकता
जो लोग सोसायटी के नाम पर राजनीति कर रहे हैं उन्हें मालूम होना चाहिए कि कॉलोनी की पूर्णता और गुणवत्ता को लेकर सुनील चौरसिया और मुकेश कुल्मी ने नेतृत्व में कई बार धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया गया था, तब कॉलोनी पूरी हुई अन्यथा भिलाई के ढांचा भवन जैसी स्थिति हो रही थी। निर्माणी कंपनी बीच में ही छोड़कर कोलकाता भाग गई थी। जो लोग आज सोसायटी में पदाधिकारी बने बैठे और भ्रम फैला रहे हैं एक समय में वे सब चौरसिया कैंप के सदस्य थे। ये अलग बात है कि आज अपना अलग रास्ता अपना लिए हैं।
कॉलोनी में शांति और सद्भाव
कॉलोनी में शांति और सदभाव की बातें की जा रही है। यदि इतनी ही चिंता है तो अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। अपराघधी और साधू की बातें छोड़कर या साधुता और बड़प्पन दिखाते हुए सर्व सम्मति से अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों का चुनाव कर लीजिए, किसने रोका है? पूरे शहर में अच्छा मैसेज भी जाएगा। आइए आगे बढ़िए और एक कदम एकता पैनल और एक कदम स्वाभिमान पैनल उठाए, सभी स्वागत करेंगे।

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