इस लड़की को 'सेक्युलर' सर्टिफिकेट, जानें क्यों


के अहमदाबाद में रहने वाले ऑटोरिक्शा ड्राइवर ने 2017 में अपना नाम बदलने का प्रयास किया था। वह इस प्रयास में असफल रहे। हालांकि सोमवार को वह और अनोखा काम करने में सफल रहे। उन्हें बेटी के स्कूल से ‘सेक्युलर’ स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट मिला है। दरअसल उनकी बेटी के स्कूल से जारी सर्टिफिकेट में कोई जाति, धर्म या कैटेगरी नहीं लिखी है।

पेशे से ड्राइवर राजवीर उपाध्याय ने बताया कि उनकी बेटी आकांक्षा के स्कूल से जारी किए गए सर्टिफिकेट में जाति, धर्म और समुदाय का कॉलम खाली छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह का अनोखा सर्टिफिकेट है, आज तक किसी को ऐसा सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ।

3 महीने से कर रहे थे कोशिशचांदखेड़ा के रहने वाले राजवीर (36) ने बताया कि वह इस तरह के सर्टिफिकेट के लिए बीते तीन महीने से प्रयास कर रहे थे। आखिर उनका प्रयास सफल हुआ और स्कूल के सर्टिफिकेट में जाति, धर्म और समुदाय वाले कॉलम में कुछ नहीं लिखा गया। उन्होंने कहा कि अगर हम लोग समाज से ऊंच-नीच का भेदभाव हटाना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें दस्तावेजों से जाति, धर्म और समुदाय हटाना होगा।

राजवीर ने बताया कि उन्होंने इस सर्टिफिकेट को पाने के लिए कई प्रतिनिधियों की मदद मांगी। उन्होंने डीएम से लेकर सीएम विजय रूपाणी तक का पत्र स्कूल में दिया, जिसके बाद स्कूल वाले उन्हें ऐसा सर्टिफिकेट देने के लिए राजी हुए। उन्होंने अपनी मांग में तमिलनाडु के वेल्लोर की वकील का केस भी रखा, जिन्होंने अपने नाम को सिर्फ स्नेहा किया है। स्नेहा ने 2019 में अपने सरकारी दस्तावेजों से धर्म, जाति और समुदाय हटवाया था।

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