भिलाई/रायपुर(cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खरीफ सीजन में किसानों से धान खरीदी के लिए नए नियम बनाए गए है। यह नियम किसानों के लिए सुविधा के बजाए परेशानी का सबब साबित हो रहा है। नए नियम के मुताबिक एक ऋण पुस्तिका में जितने खातेदार है उनको एग्रीस्टेक पंजीयन कराना अनिवार्य है अन्यता की स्थिति में धान नहीं बेच पाएंगे।
सरकार की मंशा पर सवाल
इस नए नियम से लोग सरकार की धान खरीदी की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि धान का समर्थन मूल्य बढ़ने के कारण किसानों के नाम को काटना तो नहीं है। ऐसा इसलिए कि सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना में ई-केवाईसी के नाम पर लगभग लाखों महिलाओं का नाम काट दिया गया है।
इस तरह हो रही परेशानी
सरकार के नए नियम से ऐसे किसानों को ज्यादा परेशानी हो रही है जिनके एक ऋण पुस्तिका में 10 से 15 खातेदार है। ऐसे में कई खातेदार सदस्यों के आदार और मोबाइल लिंक नहीं है। ऐसे में उनके फोन में ओटीपी कैसे आएगा। इसी तरह खातेदार के कई दूसरे राज्य या विदेश में रहते हैं उनका एग्रीस्टेक पंजीयन कैसे होगा? कई खातेदारों में पारिवारिक विवाद चल रहा है। एक-दूसरे से बातचीत नहीं है किंतु सालों से धान बेचकर उनका हिस्सा दे देते है। ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई भाई आपस में बात ही नहीं करते है। भतीजों के बात उनका पैसे दे देते है।
किसी भी सोसायटी में लिखित आदेश नहीं
यह सब सिर्फ मौखिक आदेश में चल रहा है। मैंने कई समितियों में जाकर शासन के आदेश की कापी चाही तो कहीं से भी नहीं मिली। मतलब इतना बड़ा आदेश सिर्फ मौखिक चल रहा है। एसडीएम ने तहसीलदार को और तहसीलदार ने पटवारी और समिति प्रबंधकों को आदेश दे दिए। किसी के पास शासन के आदेश की कापी नहीं है।

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