भिलाई(सीजी आजतक न्यूज)। अपने एक साथी और मजीठिया क्रांतिकारी प्रभात खबर अर्थात न्यूट्रल पब्लिसिग हाउस प्राईवेट लिमिटेड से केस जितने के बाद कंपनी ने मजीठिया मामले में एरियर का बकाया बड़ा एमाउंट (25 लाख 75 हजार रुपए) 3 सितंबर 2022 को उनके खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह एक साथी बना मजीठिया का पहला विजेता जिसके खाते में पैसा आ गया है। इस साथी ने खुद इस बात की जानकारी दी। इस साथी का नाम कुणाल प्रियदर्शी, जो मुजफ्फरपुर के प्रभात खबर यूनिट में कार्यरत थे। अब इसी के साथ ही छत्तीसगढ़ के राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र के दो दर्जन साथियों का रास्ता भी साफ हो गया। पत्रिका छत्तीसगढ़ भिलाई-दुर्ग संस्करण के 22 कर्मचारियों का मजीठिया वेजबोर्ड का केस रायपुर कमिश्नर ऑफिस में लंबित है। यहां से मामला जल्द ही लेबर कोर्ट में रेफर होगा। फिलहाल मामले में राजस्थान पत्रिका के गुलाब कोठारी को नोटिस जारी हुआ है। इस मामले में अगली सुनवाई तिथि 11 अक्टूबर 2022 निर्धारित है।
बता दें कि कुणाल प्रियदर्शी ने अपने दावे के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन दिया था। जो राज्य सरकार के प्रतिनिधि संयुक्त श्रमायुक्त के समक्ष वाद संख्या 76/2017 के नाम से दर्ज था। जिसमें उन्होंने 37,32,137 रुपया का दावा व नौकरी पुनः बहाली की मांग की थी। राज्य सरकार ने मामले को 18/06/2019 को न्याय के लिए श्रम न्यायालय को भेज दिया। जहां वाद संख्या 01/2019 के तहत श्रम न्यायालय ने दिनांक 8 फरबरी 2020 को कामगार के पक्ष में अपना आदेश पारित किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में कुणाल प्रियदर्शी को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से दावे की राशि को भुगतान की वास्तविक तारीख तक के सूद के साथ अदा करने को कहा।
प्रबंधन ने जब इसका भुगतान नहीं किया तो कामगार ने पुनः श्रम न्यायालय मुजफ्फरपुर को इस सूचना से अवगत कराते हुए आदेश के पालन कराने को वाद को व्यवहार न्यायालय मुजफ्फरपुर को हस्तांतरित करने का आग्रह किया। जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए आदेश के पालन कराने को भेज दिया गया। श्रम न्यायालय मुजफ्फरपुर से पीठासीन पादाधिकारी के आदेश से जारी पत्र क्रमांक 162/2020 दिनांक 8 फरबरी 2020 को सब जज प्रथम (पूर्वी) मुजफ्फरपुर के न्यायालय में भेज दिया। जो Execution Case No. 10/2020 (Arising Out of 01/2019) के नाम से दर्ज हुआ।

प्रबंधन ने इसके विरोध में पटना उच्च न्यायालय में CWJC 3584/2019 दर्ज किया लेकिन न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली जो अभी भी पेंडिंग हैं। 23 जुलाई 2022 को व्यवहार न्यायालय ने 16/8/2022 तक कामगार को बकाया अदा करने का आदेश दिया और नहीं अदा करने पर अकाउंट अटैच करने का आदेश दिया। और अंततः 16 तक जब प्रबंधन ने भुगतान नहीं किया तो एकाउंट अटैच हुआ। जिसके परिणामस्वरूप 3 सितंबर 2022 शनिवार को मजीठिया क्रांतिकारी कुणाल प्रियदर्शी को दावे के विरुद्ध 25 लाख 75 हजार रुपए की राशि खाता में जमा की गई। अभी करीब 2 लाख 75 हजार रुपए भविष्य निधि में भी प्रबंधन को जमा करना है। यह लड़ाई में 2017 से 2022 तक चला। जिसमें दो साल कोरोना के कारण भी प्रभावित रहा, लेकिन सब परेशानी के बाद भी कुणाल प्रियदर्शी ने हार नहीं मानी और वे सफल रहे।

एग्जीक्यूशन केस में कई ऐतिहासिक क्षण भी आये।देश में पहली बार कोर्ट ने स्वीकार किया कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के सेक्शन 17(2) के तहत पारित अवार्ड का एग्जीक्यूशन कोर्ट के माध्यम से हो सकता है।शुरुआत में कोर्ट नोटिस के बावजूद जब अखबार प्रबंधन हाजिर नहीं हुआ, तो कोर्ट के आदेश पर हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण में उन्हें हाजिर होने का नोटिस छपा। यह पहला मौका था, जब मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई में एक अखबार के प्रबंधन के खिलाफ दूसरे अखबार में इस तरह का नोटिस छपा।वेज बोर्ड के अनुसार बकाया राशि की वसूली के लिए पहली बार कोर्ट के आदेश पर किसी अखबार का बैंक अकाउंट अटैच हुआ।
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