एक ही ट्रायल पर लॉन्च होगी Covaxin? बड़ी बातें

दुनिया के साथ-साथ भारत के वैज्ञानिक भी कोरोना की दवाई खोजने में जुटे हैं। आपको बता दें कि भारत की 6 कंपनियां कोरोना टीका बनाने पर काम कर रही हैं। दुनियाभर में कुल 11 वैक्सीन ऐसी है जिन्हें ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी मिली है। फिलहला सबसे ज्यादा चर्चा कोवेक्सीन (Covaxin) की है। आज इसके बारे में सारी बातें यहां जानिए।

कोवेक्सीन के पहले ट्रायल में 375 लोग होंगे। इन्हें 125-125 के तीन ग्रुप में बांटा जाएगा। सभी को वैक्सीन की दो डोज दी जाएंगी। दूसरी डोज 14 दिन के बाद दी जाएगी। इसके बाद नतीजे दूसरे फेज के ट्रायल की दिशा तय करेंगे। उसके लिए 750 लोगों का नाम है।

वैक्सीन बनानेवाली भारत बायटोक के पत्र के मुताबिक, पहले फेज के ट्रायल में 28 दिन का वक्त लगेगा। यानी अगर 18 तारीख से पहले ट्रायल शुरू होता है तो 15 अगस्त तक को उसका पहला ट्रायल ही पूरा हो पाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 अगस्त की डेडलाइन तय क्यों की गई। अगर अब की गई है तो क्या वैक्सीन लॉन्च करने के लिए सांइस को ही ताक पर रख दिया जाएगा। क्योंकि 15 अगस्त तक दूसरे और तीसरे फेज का ट्रायल होना संभव ही नहीं है। दोनों में महीनों या साल तक लग सकते हैं। भारत बायोटेक ने अभी अपने पत्र में 3 महीने से लेकर 1 साल तक के वक्त की बात कही है।

ICMR ने 12 संस्थानों को ये ट्रायल करने के लिए चुना है। इसमें दिल्ली और पटना के एम्स भी शामिल हैं। दरअसल सरकार और ICMR पहले ही इच्छा जता चुके हैं कि वैक्सीन 15 अगस्त तक लॉन्च कर दी जाए।

भारत बायोटेक को क्लीनिकल ट्रायल मिलने से पहले कुछ पॉजिटिव रिजल्ट दिखे थे। उसने चूहे, खरगोश पर प्रयोग किया था।

भारत बायोटेक के साथ-साथ गुजरात की कंपनी जाइडस कैडिला ने भी कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया है। इसका नाम जाइकोव-डी रखा गया है। इसे भी कोवेक्सिन की तरह ट्रायल की मंजूरी मिली है।

कोरोना वैक्सीन की लिस्ट में सबसे आगे ChAdOx1 का नाम है। इसे स्वीडन की कंपनी AstraZeneca और Oxford यूनिवर्सिटी ने मिलकर बनाया है। वैक्सीन ब्राजील और साउथ अफ्रीका में तीसरे फेज का ट्रायल कर रही है। कंपनी अक्टूबर से वैक्सीन देना शुरू भी कर सकती है।

Moderna कंपनी की mRNA 1273 मई से चर्चा में है। कंपनी इस महीने फेज 3 का ट्रायल कर सकती है। सब ठीक रहने पर 2021 तक वैक्सीन तैयार हो जाएगी।

कोरोना के टीके पर सरकार भी कन्फ्यूजन में है। विज्ञान मंत्रालय ने पहले बयान दिया कि 2021 तक दोनों में से कोई वैक्सीन आना मुमकिन नहीं है, लेकिन बाद में बयान का वह हिस्सा ही हटा लिया गया।

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने दावा किया है कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (एनआईवी) के साथ मिलकर उसने कोविड-19 के लिए भारत की पहली वैक्सीन को सफलतापूर्वक विकसित किया है।

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