भिलाई/रायपुर(cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ में रेलवे का कोई माई-बाप नहीं है। सभी ट्रेनें भगवान भरोसे चल रही है। रेल के माध्यम से भारत सरकार यहां की खनिज संपदा का जिस अनुपात में दोहनन कर रही उसके हिसाब से रेलवे को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही है। सिर्फ एक ही सुविधाएं मिल रही है कि मालगाड़ी को रोका न जाए। बाकी शेष ट्रेनों की किसी को चिंता नहीं है।
पहले एक्सप्रेस को साइड अब मालगाड़ी प्राथिमकता
पहले किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन को पास देने मालगाड़ी को खड़ी कर दी जाती थी। वर्तमान में इसका उल्टा हो रहा है। अब मालगाड़ी को पास देने के लिए एक्सप्रेस सहित सुपर फास्ट गाड़ियों को कभी भी कहीं पर भी खड़ी कर दी जाती है। जिससे लोकल ट्रेने लेट हो जाती है।
हजारों लोग रोजाना करते हैं आवागमन
लोकल ट्रेन से डोंगरगढ़ से लेकर बिलासपुर तक रोजाना हजारों सरकारी और निजी कर्मचारी आवागमन करते हैं। कोरोना काल के बाद से सुपर फास्ट और एक्सप्रेस तो छोड़िए लोकल गाड़ियां भी समय पर नहीं चल पा रही है। खासकर दुर्ग-रायपुर और बिलासपुर तक चलने वाली लोकल ट्रेनें। रोजाना आवागमन करने वाले यात्री सवाल उठाते हैं कि मुंबई, दिल्ली, पंजाब, बीकानेर से आने वाली गाड़ियां समय पर पहुंच जाती है तो लोकल गाड़ियों समय पर क्याें नहीं चल पाती है? आखिर कारण क्या है समझ से परे है।
किसी भी जनप्रतिनिधि ने नहीं उठाया यह मुद्दा
डेली अप-डाउन करने वालों के अलावा छत्तीसगढ़ से आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है लेकिन किसी पार्टी के जनप्रतिनिधि, विधायक सांसद और मंत्रियों ने इस मुद्दे को विधानसभा या लोकसभा में नहीं उठाया है। इस मामले में किसी के भी बयान अब-तक नहीं आए है। शायद इसका कारण पार्टी के आकाओं के नाराज होने का डर हो सकता है। कोयला कहां और किसके के ईशारे पर जा रहा है सबको मालूम है। बताया तो यहां तक जाता है कि रेलवे प्रशासन को स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी मालगाड़ी को नहीं रोकना है। भले एक्सप्रेस ट्रेन को रोक दिया जाए। इसमें कितनी सच्चाई है मह नहीं बता सकते लेकिन चर्चा तो है और चर्चा पर कोई विराम नहीं लगा सकता है।
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