भिलाई/रायपुर( CG AAJ TAK NEWS)। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के मुख्यमंत्री बनने के बाद बीते छह महीने में उनके काफिले की गाड़ी हादसे के शिकार हुए है। पहला हादसा सीएम हाउस के सामने एसआरपी चौक रायपुर में एंबुलेंस और आर थ्री गाड़ी आपस में टकरा गई थी। दूसरा हादसा 27 सिंतबर को दुर्ग में हुआ था।
हादसे का कारण
हादसे का कारण 45 साल से अधिक उम्र के और अप्रशिक्षित लोगों द्वारा वाहन चलाने को बताया जा रहा है। नियमतः कारकेट (काफिला) में दिल्ली से प्रशिक्षण प्राप्त और प्रशिक्षित लोगों से वाहन चलवाया जाता है किंतु दोनों हादसे के दौरान बिना प्रशिक्षण (एनएसजी कोर्स नहीं किए) वाले व्यक्ति वाहन चला रहे थे।
नहीं करवाते स्वास्थ्य प्रशिक्षण
सीएम के काफिल में चलने वाले वाहन चालकों का छह महीने में नियमतः स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। कई चालक जानबूझकर स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराते हैं। बताया जाता है कि कई लोग बीपी, शुगर और दृष्टिदोष से पीड़ित है। ऐसे लोगों से भी वाहन चलवाया जाता है जो चिंतनीय विषय है। काफिले के हादसे के दौरान एक वाहन को 52 साल वाले और दूसरे को 45 साल के चालक चला रहे थे। काफिले में युवा और शारीरिक रूप से फीट लोगों की ड्यूटी लगानी चाहिए। ऐसा क्यों नहीं हो रहा यह जांच का विषय है।
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एमटीओ की चल रही मनमर्जी
बताया जाता है कि सीएम के काफिले में वाहन चलाने के लिए ड्यूटी लगाने में एमटीओ की मनमर्जी चल रही है। आरक्षकों से भी काफिले के वाहन चलवाए जा रहे हैं। सीएम के काफिले में 8 वाहन चलते है। इसके लिए 24- 24 घंटे की दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है और अगले 24 घंटे की छुट्टी दी जाती है। इसमें भी कई लोग शहर में ही रहने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए जुगाड़ लगाकर अपनी ड्यूटी लगा लेते है। नियमतः 45 साल से कम उम्र वाले की ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन मनमानी के चलते 45 से ऊपर और 50-52 साल के लोगों से भी वाहन चलवाए जा रहे है। जिसके गंभीर परिणाम हो सकते है। इस दिशा में उच्चाधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है।
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