भिलाई/रायपुर(cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ में देहदान के नाम पर भारी भ्रष्टाचार चल रहा है। प्रदेश में कई लोग मौत के पहले और तुरंत बाद शरीर के विभिन्न अंगों का दान करते हैं लेकिन जरुरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इसका प्रमुख कारण देहदान के नाम पर भारी भ्रष्टाचार है। इनमें गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) और मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) विभाग की मिलीभगत है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज में अब तक किए गए देह और अंगदान का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका खुलासा आरटीआई में हुआ है।
दरअसल देह और अंगदान के नाम पर छत्तीसगढ़ में करोड़ों का खेल चल रहा है। यह खेल सामाजिक संस्था और मेडिकल कॉलेज की मिलीभगत से चल रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद आज तक किए गए अंगदान (organ donation) का कोई रिकॉर्ड संबंधित विभाग में नहीं है। किस जरूरतमंद को मृतक के किन अंगों के दान का लाभ मिला है, इसकी भी अधिकृत जानकारी नहीं है। जिनको लाभ मिला है वे भी राजनीतिक रसूख और पैसे वाले हैं। किसी गरीब आदमी (वास्तविक जरूरतमंद) को इसका लाभ नहीं मिला है।
इसी कड़ी में दुर्ग जिले के पाटन तहसील के ग्राम सेलूद के एक व्यक्ति ने देहदान की इच्छा जताई थी उन्होंने और उनके भोपाल के एक मित्र ने इस संबंध में दुर्ग और भिलाई के संस्थाओं से जो अंगदान कराते हैं उनसे संपर्क किया था लेकिन सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इस संबंध में संस्था से हुई बातचीत का ऑडियो सीजी आजतक न्यूज के पास है। बीते 1 अगस्त 2025 को उस सज्जन की मौत हो गई। यदि समय रहते देहदान हो गया होता तो शरीर मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट्स की पढ़ाई में काम आता।
जानकारी के अनुसार ऐसे सामाजिक संस्थाओं का कोई अधिकृत लेखा-जोखा नहीं है। संस्था में कौन कौन लोग पदाधिकारी और संस्था कब से संचालित, सालाना आय-व्यय का ऑडिट रिकॉर्ड भी नहीं है। कहने का मतलब देहदान कराने वाली संस्था सेवा के नाम पर अपनी दुकानदारी चला रहे हैं।
अगली किस्त में दुर्ग भिलाई के ऐसे संस्थाओं की खुलासा सबूत के साथ किया जाएगा….

dsfgvjsadc
