राजस्थान पत्रिका को फिर झटकाः मजीठिया वेतनमान मांगने वाले कर्मी को बर्खास्त करना पड़ा भारी, जबलपुर हाईकोर्ट ने सेवा बहाली के साथ संपूर्ण लाभ देने का आदेश किया पारित

भिलाई/रायपुर(cgaajtak.com)। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद भी कोरोना संक्रमण काल में कर्मचारियों को संस्थान के निकालने के मामले में कोर्ट कचहरी का सामना करने वाले राजस्थान पत्रिका प्रायवेट लिमिटेड को माननीय हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ से एक बार फिर झटका लगा है। हाईकोर्ट ने मजीठिया प्रकरण में पत्रिका प्रबंधन को बर्खास्त कर्मचारी को न सिर्फ सेवा में बहाली के आदेश दिए बल्कि मजीठिया वेजबोर्ड का संपूर्ण लाभ देने का भी आदेश पारित किया है।

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दरअसल मजीठिया वेतनमान की मांग करने वाले कर्मी विजय कुमार शर्मा को नौकरी से निकालना भारी पड़ गया। धर्म और अध्यात्म के साथ राजनीति और समाज को दिशा निर्देश देने का दंभ भरने वाले पत्रिका प्रबंधन की इस मामले में हेकड़ी निकल गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को गैरकानूनी करार देते हुए पत्रकार की सेवा बहाली, बकाया वेतन का भुगतान सहित पुनर्नियुक्ति का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा- पत्रिका ने सोशल मीडिया को आधार मानकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की उसके संबंध में कोर्ट में कोई सबूत/दस्तावेज प्रसतुत नहीं कर पाया, लिहाजा औद्योगिक विवाद अधिनयम की धारा 33(2) (ई) का स्पष्ट उल्लंघन माना। कोर्ट ने यह भी माना कि पत्रिका प्रबंधन ने यह कार्रवाई मजीठिया वेतनमान की मांग करने के कारण “बदले की भावना, जिसमें कर्मी की मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ” की है। 

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यह है मामला

विजय कुमार शर्मा साल 2002 से राजस्थान पत्रिका प्रायवेट लिमिटेड में कार्यरत थे, उन्हें साल 2011 में सब एडिटर के पद पर पदोन्नत किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवंबर 2011 में मजीठिया वेतनमान की व्यवस्था श्रमजीवी पत्रकार और गैर पत्रकारों (प्रेस कर्मचारियों) के लिए की है। इसी के परिपालन में विजय शर्मा और उनके साथियों ने मजीठिया वेतनमान की मांग की। इसके बाद उनका स्थानांतरण पहले बेंगलुरू, फिर भोपाल उसके बाद जगदलपुर(छत्तीसगढ़) कर दिया, जिसका उन्होंने विरोध करते हुए लेबर कोर्ट में मामला दर्ज कराया। पत्रिका प्रबंधन ने इसी दौरान सोशल मीडिया पर कथित पोस्ट को लेकर चार्जशीट जारी की और जून 2016 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

हाईकोर्ट ने पाया कि लेबर कोर्ट ने सेवा समाप्ति की अनुमति नहीं दी थी इसके बाद भी विजय शर्मा को दोषी ठहराकर सेवा से निकाल दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में  सुप्रीम कोर्ट के “जयपुर जिला सहकारी भूमि विकास बैंक बनाम रामगोपाल शर्मा” मामले का हवाला देते हुए कहा कि जब स्वीकृति नहीं दी गई तो बर्खास्तगी स्वयमेव शून्य मानी जाती है और कर्मचारी को सेवा माना जाता है। इस फैसले को देशभर के पत्रकार संगठनों ने श्रमिक अधिकारों की बड़ी जीत बताया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार विजय कुमार शर्मा की सेवा तत्काल बहाल की जाएगी, उन्हें बकाया वेतन, सेवा निरंतरता और अन्य सभी लाभ दिए जाएंगे। वहीं राजस्थान पत्रिका प्रबंधन की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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राजस्थान पत्रिका की मंशा पर सवाल

हाईकोर्ट ने माना कि पत्रिका प्रबंधन ने जानबूझकर मजीठिया वेतनमान की देनदारी से बचने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का सहारा लिया। यह न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर प्रहार बल्कि संस्थागत जवाबदेही को कमजोर करने की साजिश भी मानी जा सकती है।  

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