भिलाई/रायपुर(cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में नो हेलमेट नो पेट्रोल की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस संबंध में कई जिलों के कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं राजधानी रायपुर में भी पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लिया है। अब पंप पर बिना हेलमेट के पहुंचने वाले दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन सौंपकर जानकारी भी दी है।
लोगों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
दरअसल लोगों की जान माल की सुरक्षा सरकार और शासन की जिम्मेदारी है और होनी भी चाहिए। हर साल सड़क हादसे में हजारों लोगों की जान चली जाती है। इनमें एक बड़ा कारण हेलमेट नहीं पहनना और सिर पर गंभीर चोट लगना है। ये अच्छी बात है सरकार और शासन दो-पहिया वाहन चालकों की सुरक्षा की चिंता के लिए सख्ती से नियम का पालन करवा रही है। लेकिन इसके इतर पेट्रोल पंपों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुध नहीं ले रही है।
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पुलिस विभाग द्वारा संचालिक पेट्रोल पंप
पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों को आज भी कलेक्टर दर पर वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। हम निजी पेट्रोल पंप संचालकों की बात नहीं कर रहे हैं। सरकार (पुलिस विभाग) द्वारा संचालित पंप की बात कर रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में पुलिस विभाग द्वारा पेट्रोल पंपा का संचालन किया जा रहा है। पंप में काम करने वाले कर्मचारियों का ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि Employee Provident Fund), ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा Employee State Insurance) की सुविधा तो छोड़ों सम्मानजनक वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। शासन को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है।
सरकारी पंप में श्रम कानूनों का उल्लंघन
पूरे प्रदेशभर में संचालित पेट्रोल पंप में श्रम कानून का पालन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों के काम के घंटे, साप्ताहिक छुट्टी (वीकली ऑफ), सम्मानजक वेतन आदि में अंतर है। कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन मिलेगा को पंप में चोरियां भी रुकेंगी। दुर्ग-भिलाई सहित अन्य जिलों में संचालित पुलिस पेट्रोल पंप में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को न तो सम्माजनक वेतन दिया जा रहा है न ही श्रम कानून का पालन किया जा रहा है। कई कर्मचारियों की उम्र 50 साल से अधिक हो गई है। उन्हें काम करते हुए 30-40 साल हो गए हैं। कर्मचारियों से 10-10, 12-12 घंटे तक काम करवाया जाता है। सम्मानजनक वेतन दिलाने और श्रम कानून का पालन करवाने की जिम्मेदारी भी कलेक्टर की है। यदि ऐसा होता है तो सालों से कार्यरत कर्मचारियों के अलावा उनके परिवार और बच्चे भी दुआ देंगे।
