मंदिर की आड़ में कबाड़ी का धंधा या कबाड़ी के ठिकाने पर मंदिर? बीएसपी, रेलवे, जीआरपी, निगम, पुलिस प्रशासन सब मौन

भिलाई(cgaajtak.com) भिलाई पावर हाउस रेलवे स्टेशन के समीप और ब्रिज के नीचे कबाड़ी का धंधा जोरों से फल फूल रहा है। कबाड़ी दुकान से थाने की दूरी मात्र 200 मीटर और आरपीएफ ऑफिस चंद कदमों की दूरी पर है। इसके बाद भी कई सालों से यह धंधा चल रहा है। कबाड़ दुकान संचालक भिलाई इस्पात संयंत्र से लोहा और रेलवे से कोयला की चोरी करवाता है। यह सब काम जिम्मेदारों की नाक के नीचे हो रहा है। चर्चा तो यह है कि इस काम के एवज में पुलिस के एक आला अधिकारी को लाखों रुपए महीना जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि शिकायत के बाद भी इस कबाड़ी संचालक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

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पांच विभागों का संरक्षण
जहां पर कबाड़ी दुकान है वह जगह रेलवे और बीएसपी के अधीन है। दुकान में बिजली कैसे लग गई है यह जांच का विषय है। इसी तरह उसे पानी कहां से मिल रहा है। यह भी जांच का विषय है। जीआरपी और आरपीएफ जिसकी जवाबदारी रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा करना है उसकी मिलीभगत पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि गरीबों की झोपड़ी तोड़ने में त्वरित कदम उठाने वाला बीएसपी प्रबंधन कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है। बिजली विभाग लाइन क्यों नहीं काट रहा है। पानी कहां से मिल रहा है इन प्रश्नों का जवाब जिम्मेदारों के पास नहीं है। बीएसपी का तोड़फोड़ दस्ता उसे बेदखल क्यों नहीं कर रहा है यह भी अहम सवाल है?

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नेताओं की सरपरस्ती
बताया जाता है कि उक्त कबाड़ी संचालक पर नेताओं की सरपरस्ती भी है। पहले बीजेपी के नेता संरक्षण देते थे। बताया जाता है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस विधायक का संरक्षण मिला था। अब फिर एक बीजेपी नेता के पुत्र का संरक्षण मिलना बताया जा रहा है। मतलब पैसे के आगे सब लाचार। काम कैसा भो हो, लीगल या अनलीगल बस सबको पैसा मिलना चाहिए।

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मंदिर में कबाड़ी दुकान खुली है या चोरी के काले कारनामों को छिपाने के लिए मंदिर में प्रतिमा की स्थापना की गई है, यह आसपास के लोग भी नहीं जानते है। सिर्फ इतना जानते है कि वहां पर मंदिर है। किसने स्थापना की कौन पुजारी यह भी नहीं मालूम। मंदिर की आड़ में और रेलवे की सीमा रेखा वाली दीवार पर विशेष समुदाय के लोगों की कई झोपड़ियां बन गई है।

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