भिलाई/रायपुर (cgaajtak.com)। छत्तीसगढ़ में नए दुग्ध संयंत्र लगाने के नाम पर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में ऐसा लगता है कि एक प्रधानमंत्री के ईमानदार होने से क्या फायदा। पूरे देश और सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़े बहुत गहरी है। देश और सिस्टम को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने में अभी और कई दशक लगेंगे तब कही जाकर पूरा सुशासन आ सकता है। यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे अफसर और कर्मचारी सुधर जाए तो जनता अपने आप सुधर जाएगी। देश में कमीशनखोरी का आलम ऐसा है कि जिस योजना और संयंत्र की जरूरत नहीं है उसे भी सिर्फ कमीशन (सरकारी पैसे का दुरुपयोग) के लिए अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जिले के समीप नया दुग्ध प्लांट लगाया जा रहा है जिसकी जरूरत जिले तो क्या पूरे प्रदेश को नहीं है। इसको लगाने के पीछे का तर्क भी बड़ा अजीब है।
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छत्तीसगढ़ में 250 करोड़ की लागत से न्यू यूनिट लगाई जा रही
दरअसल नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा छत्तीसगढ़ में न्यू यूनिट लगाई जा रही है। दूध डेयरी के नए प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार रुपए 250 करोड़ देने जा रही है। उससे पहले इस दूध डेयरी में पिछले 40 वर्षों में एक लाख लीटर दूध की खपत नहीं हो पाती है, क्योंकि इतना दूध किसानों से मिलता ही नहीं है। अब उसकी क्षमता को तीन लाख लीटर कर नए प्लांट की तैयारी चल रही है। बताया जाता है कि इस प्रोजेक्ट से बिचौलियों को लगभग 200 करोड़ रुपए का फायदा होगा। यदि ऐसा होता है तो दूध डेयरी का कम्हारी का पराना प्लांट बंद हो जाएगा या किसी और को दे दिया जाएगा। बताया जाता है कि इस संबंध में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह को भी गुमराह किया गया है। इस बाबत पहले हुई बैठकों में उन्हें अधिकारियों द्वारा गलत जानकारी दी गई है।
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उठते सवाल
ऐसी योजनाएं कैसी बनती है। योजना बनाने वाले ने इस नए संयंत्र के फायदे, नुकसान, मैन पावर, रॉ मटेरियल और ट्रांसपोर्टिंग (वितरण व्यवस्था) जैसी बातों का शायद ध्यान नहीं रखा गया है। वर्तमान में चल रहे प्लांट प्रबंधन से भी (घाटे या फायदे जैसे प्रमुख पहलुओं) कोई फीडबैक नहीं लिया गया है। यदि योजना फेल हो जाती है तो ऐसे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी या नहीं यह सवाल भी भविष्य के गर्त में है?
अगली किस्त में प्रोजेक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी…

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